महापुरुषों का अदम्य इच्छा शक्ति

                     महापुरुषों का अदम्य इच्छा शक्ति
              लूथर ने 21 वर्ष कि कि उम्र में धार्मिक सुधारो के लिए क्रांतिकारी हलचल पैदा कर दी थी । नैपोलियन ने 25 वर्ष कि उम्र में इटली पर विजय प्राप्त कि थी । न्यूटन ने 21 वर्ष का होने से पूर्व ही अपने महत्वपूर्ण आविष्कार कर डाले थे । चेस्टरटन ने जब काव्य-क्षेत्र में प्रवेश करके अपनी प्रतिभा से सबको आश्चर्य में डाला था, तब वह 21 वर्ष का था। विक्टर ह्यूगो जब 15 वर्ष के थे , तब उन्होंने कई नाटक लिखे थे और तीन पुरस्कार जीते थे । सिकंदर जब दिग्विजय को निकला तब कुल 21 वर्ष का था । फ्रांस कि क्रांति का नेतृत्व करने वाली जॉन 17 वर्ष कि थी। स्वामी विवेकानन्द व शंकराचार्य को अल्पायु में ही उपलब्धियाँ मिली थी ।
                 वास्तव में यदि उत्कृष्ट इच्छा और अदम्य भावना जाग्रत हो जाए तो किशोर आयु में भी मनुष्य अपनी शक्तियों के सुनियोजन द्वारा ऐसा कुछ कर सकता हैं, जिससे उसका जीवन भी धन्य हो एवं वह अनेको को पार लगा सके 

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