नमस्कार मित्रो, आशा करता हूँ की आप सभी पाठक सकुशल होंगे, आज मैं आप लोगो को एक ऐसे इंसान की कहानी बताने जा रहा हूँ जिसको कुदरत से अभिशाप मिला था या वरदान, एक तरफ से उसे शारीरिक विकलांगता मिली तो दूसरी तरफ प्रकृति का एक ऐसा अदभुत वरदान मिला जिस से आज वो दुनिया के उन चुनिंदा नामो में शामिल हैं जिसमे इंसान खुद का नाम देखने के सपने देखता हैं। जब विशेष प्रतिभावान चरितार्थ की हो तो उसमे लेस्ली लेम्के का नाम आना स्वाभाविक हैं। लेस्ली का जन्म अमेरिका में सन 1952 में हुआ और उसके जीवन के प्रारंभिक वर्ष अत्यंत कष्टप्रद रहे। लेस्ली को जन्मजाट ग्लूकोमा, सेरिब्रल पाल्सी और ब्रेन डेमेज था। जिसके कारण चिकित्सकों को उसकी आँखे निकालनी पड़ी। उसको जन्म देने वाली माँ ने उसे छोड़ दिया, पर एक सहृदय नर्स, मेरी लम्के ने उसे गोद ले लिया। मेरी के अपने पाँच बच्चें थे और उसकी आर्थिक दशा अच्छी नही थी, पर इसके बावजूद उसने लेस्ली का लालन-पालन सगी माँ से ज्यादा बढ़कर किया। लेस्ली स्वयं खाना खा पाने में सक्षम नही था और वो चलना भी 15 वर्ष की उम्र में सीख पाया, दृष्टिहीन तो वो पहले से ही था। इतने कष्टों के बावजूद एक दिन ...